विधानसभा चुनाव से पहले गर्माई सियासत: भाजपा नियुक्तियों से सरकारी संसाधनों के उपयोग पर बहस तेज

Published: 14 Oct 2026, 01:41 PM
Category: राज्य   |   By: Saluja Express

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारी नियुक्त कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है, लेकिन इन नियुक्तियों ने एक नई सियासी बहस छेड़ दी है। विवाद का कारण यह है कि नियुक्त किए गए प्रभारियों में 18 ऐसे चेहरे भी शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने दायित्वधारी मंत्री का दर्जा दिया हुआ है।

इन दायित्वधारियों को सरकार की ओर से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कार्यों को जनता तक पहुंचाना या उनकी निगरानी करना होता है। अब उन्हें पार्टी संगठन के लिए भी चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दायित्वधारियों को उनके सरकारी पदों से हटाने की मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकारी सुविधाओं का उपयोग पार्टी के संगठनात्मक या चुनावी कार्यक्रमों में किया जाता है, तो यह सरकारी खजाने का दुरुपयोग माना जाएगा। इस मुद्दे ने सरकार और संगठन की जिम्मेदारियों के बीच स्पष्टता तथा सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है।

फिलहाल, यह देखना बाकी है कि इस राजनीतिक बहस का आने वाले विधानसभा चुनावों पर क्या असर पड़ता है और भाजपा इन आरोपों पर क्या सफाई पेश करती है।

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