UTU पेपर लीक: प्रोफेसर पर गिरी गाज, सात साल का प्रतिबंध, जांच समिति की रिपोर्ट से खुलासा

Published: 16 Sep 2026, 02:31 PM   |   Updated: 16 Sep 2026, 02:32 PM
Category: राज्य   |   By: Saluja Express

देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में हाल ही में हुए पेपर लीक मामले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि एक इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत प्रोफेसर ने ही परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंचाए थे। इस गंभीर अनियमितता के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

कुलपति के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मामले की गहन पड़ताल की। समिति ने संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की। जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे एक प्रोफेसर का हाथ था, जिसने अपनी पद का दुरुपयोग करते हुए छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचाया।

जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों लीक हुए विषयों, 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' और 'इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी' की परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया। साथ ही, जिम्मेदार पाए गए प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा से जुड़े कार्य में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हजारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस कृत्य पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए न केवल परीक्षाएं रद्द कीं बल्कि दोषियों को भी दंडित किया। अब इन विषयों की नई परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित हैं, जिसकी विस्तृत जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी।

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